टीवी शुरू करने पर कुछ महिलाओं को मिठाई बाँटते देखा, बुरका पहने महिलाओं को कम ही मौकों पर इस तरह खुल कर ख़ुशी मनाते देखा है।
चलिए तीन तलाक पर फैसला आ ही गया, परन्तु समझ नहीं आ रहा है तीन तलाक पर फैसला कहूँ या तुरंत तलाक पर फैसला….

 

फैसले को मोटे-मोटे तौर पर पढ़ने से यह समझ आ गया कि फैसले का आधार पुरुष और महिलाओ में असमान वितरित अधिकार नहीं था, बल्कि तीन तलाक को एक बार में ही दे देने को अमानवीय करार देकर फैसला दिया गया था !

 

मैं इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत मान रहा था , दिल किया इसका इतिहास भी तलाशूं , खैर जो सामने आया वो मज़ेदार था। 21 इस्लामिक मुल्को में इसे गैर क़ानूनी किया जा चुका है। सबसे पहले मिस्त्र ने, जब हम आजाद भी नहीं हुए थे तब से इसको बंद कर दिया था और तो और हमारे पिछड़े हुए पडोसी ने भी इसको 1961 में नेहरु जी जैसे लिबरल के दौर में ही अस्वीकार कर दिया था !
ये जीत है या महज एक शुरुआत ?? ….पता नहीं !
पहले मैं इस फैसले का स्वागत कर लेता हूँ, और मैं इसको महिलाओ के मंदिर में प्रवेश के बाद की कड़ी के तौर पर देखूंगा ( ऐसा करने से शायद आप लोग मुझे धर्मनिरपेक्ष मान लेंगे 😛 )

 

एक और जानकारी जो ध्यान में आ गयी, उसे share किये चलता हूँ। जिन 6 महिलाओ ने इस “पाप” के खिलाफ बीड़ा उठाया था, उनमें से एक महिला को शादी और 2 बच्चो के बाद छोड़ दिया गया, फिर से “हलाल” कर के अपनाया गया तथा फिर से 2 और बच्चो के बाद (Total 4,समझने में आसान कर देता हूँ ) छोड दिया जाता है। वैसे हमे खास फर्क नही पड़ना हैं, हम अपने-अपने टीवी चैनलों और नेताओं की व्यख्या को देख कर अपने अंतिम विचार बना लेंगे !

 

चलिए तीन तलाक पर आगे बढते हैं.. सरकार ने लगभग साफ़ कर दिया है कि कानून बनाने की जरुरत नहीं हैं और इसके लिए IPC काफी हैं (वैसे SC के फैसले पर सरकार को बधाई पूरी मिल रही है 😀 ) रही बात इसको अमल करने की तो इसको अमल में लाने का काम भी उन्ही मौलवियों और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पास है, जो आज तक इस प्रथा से महिलाओं को बचाए हुआ था..!!

 

 

 

वैसे संविधान की बारीकियों और क़ानूनी चाल बाजियों से परे कुछ “सक्रिय” महिलायें इस फैसले भर को इंसाफ मान चुकी हैं, उन्हें आगे कुछ नहीं चाहिए !
बहुत ध्यान से पढने और समझने के बाद पता लगा कि शरियत इंसानों द्वारा ही बनाया गया कानून हैं और इसमें बदलाव लाये जा सकते हैं। “ईश्वरीय” कानून “पवित्र कुरान” ही है !
अब उम्मीद हैं तीन तलाक की तरह Owner Killing, बहु विवाह, हलाला को भी चुनावी मुद्दा बनाया जायेगा और SC में मामले को जैसे-तैसे पंहुचा दिया जायेगा…फिर टकटकी लगा कर सब राम (SC) भरोसे छोड़ दीजिएगा….

 

 

“अब तक ये कुप्रथा क्यों थी ?”
क्योंकि किसी ने आज तक मुस्लिम महिलाओ को वोट बैंक की तरह देखा ही नहीं.. जब “नज़र” पड़ी तो नतीजे आप के सामने हैं।
जाने दीजिये स्वागत करना और निंदा करना हमारे DNA में शामिल हो गया हैं.. इसीलिए दिल खोल के स्वागत करिए वरना क्या पता हमें भी नेशनलिस्ट होने का सर्टिफिकेट मिलने में दिक्कत हो जाये ….

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